रविवार 4 अक्टूबर 2026 - 07:03
इटली में हिजाब को चुनावी प्रचार का मुद्दा बनाने पर सवाल

इटली में एक राजनीतिक दल ने स्कूलों में चेहरा ढकने वाले किसी भी प्रकार के नकाब पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया है। आलोचकों का कहना है कि यह मुद्दा वास्तविक सामाजिक समस्या के बजाय चुनावी राजनीति का हिस्सा है, क्योंकि देश में बहुत कम संख्या में छात्राएं ही चेहरे को पूरी तरह ढकने वाला नकाब पहनती हैं, जबकि अधिकांश मुस्लिम छात्राएं स्कूलों में सामान्य पोशाक के साथ हिजाब पहनती हैं।

हौज़ा न्यूज एजेंसी के अनुसार, 58 वर्षीय गणित शिक्षिका मौलिका लॉरा एनरिलो ने कहा कि कुछ छात्राएं स्कूल में सिर पर स्कार्फ पहनती हैं, लेकिन उन्होंने अपने पूरे शिक्षण करियर में किसी छात्रा को नकाब पहने हुए नहीं देखा। उन्होंने कहा कि संभव है कि अन्य स्कूलों में एक-दो छात्राएं ऐसा करती हों, लेकिन इसे चुनावी प्रचार का मुद्दा बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इटली में जो छात्राएं स्कूल में हिजाब पहनना चाहती हैं, वे ऐसा करती हैं और उन्हें कोई परेशान नहीं करता। न शिक्षक और न ही अन्य छात्राएं उनके लिए समस्या पैदा करते हैं।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने रविवार को अपनी रूढ़िवादी राष्ट्रवादी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ (FdI) की एक सभा के दौरान प्रस्तावित प्रतिबंध का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को स्कूल में अपना चेहरा ढककर नहीं आना चाहिए और इस कदम को लैंगिक समानता की दिशा में उठाया गया कदम बताया।

इतालवी सरकारी समाचार एजेंसी अंसा के अनुसार, वर्तमान में पूरे देश में 500 से 600 से भी कम छात्राएं ऐसी हैं जो अपना चेहरा पूरी तरह ढकने वाला परिधान पहनती हैं।

गणित शिक्षिका लॉरा ने कहा कि यदि कोई छात्रा नकाब पहनकर स्कूल आती है, तो वह उसे घर जाने के लिए नहीं कह सकतीं। उन्होंने कहा, “मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उसके साथ एक किशोरी की तरह व्यवहार करूं, जो मानती है कि वह सही काम कर रही है। मुझे उसका सम्मान करना चाहिए।”

मिलान की मस्जिद के इमाम याह्या पालाविचिनी ने प्रस्तावित प्रतिबंध की आलोचना करते हुए इसे एक “कृत्रिम समस्या” बताया। उन्होंने कहा कि इससे एक बहुत छोटे अल्पसंख्यक द्वारा पहने जाने वाले परिधान पर अनावश्यक रूप से सार्वजनिक ध्यान केंद्रित हो रहा है और इससे इस्लाम के प्रति लोगों की समझ भी प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यह समाज के लिए एक ही तरह का मॉडल थोपने का प्रयास है, जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। उनके अनुसार, जब किसी अलग सांस्कृतिक या धार्मिक व्यवहार को राजनीतिक और भ्रामक तरीके से पेश किया जाता है, तो उसके आधार पर समाज के एक वर्ग की विकृत छवि बनाई जा सकती है और इससे राजनीतिक हितों को बढ़ावा मिलता है।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha